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Maharajganj Lok Sabha by-poll result: JD(U) loses, RJD revives

Bihar’s ruling Janata Dal-United’s (JD-U) PK Shahi on Wednesday faced defeat at the hands of opposition Rashtriya Janata Dal (RJD) candidate Prabhunath Singh in the first three rounds of counting for the by-election to the Maharajganj Lok Sabha seat, a report said. 

Singh was leading Shahi by over 31,000 votes. The counting is likely to be rounded off at around 3 pm.

There was jubilation in the RJD camp as this was the first time in seven and half years that it had stolen a march over the JD-U in a by-election. 

Taking a potshot, Rashtriya Janata Dal supremo Lalu Prasad Yadav said the by-poll result underlined the defeat of Nitish Kumar’s arrogance.

Blaming the misrule of the Nitish Kumar-led NDA and “the corruption that has overtaken Bihar in every sphere”, Yadav said: “This is the beginning of the end of the Nitish-led regime”. 

Voting took place on Sunday with 47 percent polling. The seat had fallen vacant after the death of RJD MP Umashankar Singh.

The JD-U was backed by the Bharatiya Janata Party while the Lalu Prasad-led RJD had the support of the Lok Janshakti Party. The Congress had fielded Jitendra Swami.

Source: Zee News

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Rajneeti aur Bihar

राजनीति और बिहार

राजनीति और िबहार का बहुत पुराना िरशता रहा है। वाे चाहे डाॅ राजेन्द्र बाबू हाे या जयप्रकाश नारायण हाे या आजकल के जाली नेता जिनका नाम लेना भी मैं ज़रूरी नहीं समझता। लेकिन इन सब के बावजूद हमारा कुछ भला नहीं हाे पाया वाे कहते है ना ज़्यादा जाेगी मठ उजार। काेई आया ताे दशकाे तक हमें गँवार बनाये रखने की कोिशश ताे किसी ने जात पाँत के नाम पे अनपढ़ काे हमारा मुख्यमंत्री बना दिया अाैर दुिनया को democracy का उदाहरण पेश िकया। अब बारी थी हमारे सुशासन बाबू की जाे development के नाम पे दूसरी बार भी जीत ताे गए ।लेकिन उनकी जीत शायद इसलिये भी थी कयोकी हमारे पास उनका काेई विकल्प नहीं था ।

आैर अब बात की जाय उनसे उम्मीदों की तो वो भी सिर्फ़ समाचार पत्रों में सिमट के और िमडिया के हेडलाइन्स में सिमट के रह गई। उधर उनके नेता महिला रिपोटर की िपटाई में लगे रहे आैर सुशासन बाबू सुशासन आैर महिला अधिकार की बात करते रहे, हम नौकरी के लिए दुिनया भर मे घुमते रहे आैर वो Special Status िक माँग मे लगे रहे जब इससे भी मन नही भरा िबहार तो िबहार वो दिल्ली में भी नरेन्द्र मोदी के रास्ते में रोड़े की तरह अरे रहे। मानता हुँ कि कुछ हालात बदले लेकिन क्या उनसे हमारी इतनी ही उम्मीद थी ? क्या हम ज़िन्दगी भर रिफयुजी की तरह जियेंगे आैर वाे अपना उल्लू सीधा करके चलते बढ़ेंगे ? मैं भी देखता हुँ आप देखिये मैं भी सोचता हु आप भी सोचिए कही यही राजनीती हमारे Development में रूकावट न बन जाये।